Monday, 14 March 2016

संस्कृत विभाग के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों का परिचय -

1. डॉ. नित्यानन्द शर्मा
  •       संस्कृत विभाग में सबसे पहले डॉ. नित्यानन्द शर्मा की नियुक्ति 4 अगस्त सन् 1959 में हुई।
  •       आपका कार्यकाल 31 जुलाई सन् 1996 में पूरा हो गया था। बाद में 5 साल के लिये और बढ़ा दिया गया। 
  •       आप पहले लैक्चरर, रीडर और फि उप-प्राचार्य प्राचार्य के रूप में कॉलेज को अपनी सेवाएँ प्रदान करते रहे। 
  •       सन् 2000 में सर्विस काल में ही प्राचार्य पद पर रहते हुए आपका असामयिक निधन हो गया। 
  •       आपने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए., एम.ए. किया एवं दिल्ली विश्वविद्यालय से ही सन् 1973 में 'शब्दपरिपाक इन कालिदासाज् पोयट्री' इस विषय पर पीएच्.डी. की उपाधि प्राप्त की।
  •     विशेषता- आपको 'मेघदूतम्' के श्लोक गाना नाटकों का अभिनय करना अच्छा लगता था। आपने 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक में दुष्यन्त का अभिनय किया था। 
  •       आपको दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा भी विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किया गया।

2. डॉ. प्रह्लाद कुमार
  •       आपकी नियुक्ति सन् 1970 में हुई थी। 
  •       आप अच्छे वक्ता, गायक, स्वभाव से विनम्र, प्रसन्नचित्त मिलनसार थे।
  •       दुर्भाग्यवश 15 जून 1977 में असामयिक निधन होने के कारण आप ज्यादा समय तक महाविद्यालय को अपनी सेवाएँ नहीं दे पाये। 
  •       'डॉ. प्रह्लाद कुमार स्मारक समिति' के माध्यम से संस्कृत जगत् आज भी आपको श्रद्धा से याद करता है।

3. डॉ. पुषराज जैन   
  •       आपकी नियुक्ति 9 सितम्बर सन् 1977 में हुई। 
  •       आप कॉलेज में लैक्चरर, रीडर प्राचार्य पद पर रहते हुए 30 सितम्बर 2014 को सेवानिवृत्त हुए। 
  •       आपने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए., एम.ए. किया दिल्ली विश्वविद्यालय से ही 'महात्मा गाँधी के चिन्तन में संस्कृत वाङ्मय का योगदान' इस विषय पर 1991 में पीएच्.डी. की उपाधि प्राप्ति की।     

    विशेषता- 

  • आपने महात्मा गाँधी पर विशेष काम किया है। 
  • आपकी 'सनातन धर्म और महात्मा गाँधी' नाम शीर्षक से पुस्तक भी प्रकाशित हुई है।
  • समय-समय पर देश के विभिन्न अखबारों पत्र-पत्रिकाओं में भी आपके लेख प्रकाशित होते रहे हैं। 
  • आप श्रीमद्भगवद्गीता के विद्वान् हैं, आपको अनेक श्लोक याद हैं, आप ओजस्वी भाषण देते हैं, व्यवहारकुशल हैं, आप सामाजिक, धार्मिक गतिविधियों में भी संलग्न रहते हैं।

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